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पवित्र बाइबिल

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पवित्र बाइबल - उत्पत्ति 1:29 जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड . सारी पृथ्वी के ऊपर है और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं , वे सब मैंने तुम को दिए हैं , वे तुम्हारे भोजन के लिये है , स्पष्ट है परमेश्वर ने मनुष्य के खाने के लिए शाकाहारी भोजन दिया । ईसाई भाई मांस खाकर प्रभु के आदेश का उलंघन कर रहे हैं ।

कबीर साहेब

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कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है , जयंती नहीं ! सन् 1398 ( विक्रमी संवत् 1455 ) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को सुबह - सुबह ब्रह्ममुहुर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब पर कमल के फूल पर विराजमान हुए । पूर्ण परमात्मा का माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता ।

कबीर साहेब प्रकट दिवस

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Kabir Saheb Manifest Day कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है , जयंती नहीं ! सन् 1398 ( विक्रमी संवत् 1455 ) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को सुबह - सुबह ब्रह्ममुहुर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब पर कमल के फूल पर विराजमान हुए । पूर्ण परमात्मा का माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता ।

तत्वज्ञान

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कबीर परमेश्वर जी ने बताया कि ब्रह्मा , विष्णु , महेश की भी जन्म तथा मृत्यु होती है । इनकी माता दुर्गा तथा पिता काल ( ब्रह्म ) हैं । कबीर , मां अष्टंगी पिता निरंजन , ये जम दारुण वंशन अंजन । तीन पुत्र अष्टंगी जाए , ब्रह्मा , विष्णु , शिव नाम धराए ।। अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी चैनल शाम ७:३९ pm. 

कबीर साहिब की लीलाएं

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कसाई का उद्धार गरीब , राम नाम सदने पीया , बकरे के उपदेश । अजामेल से उधरे , भक्ति बंदगी पेश ।। एक सदन नाम का कसाई था । संत गरीबदास जी ने बताया है कि परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि जो मेरी शरण में किसी जन्म में आया है , मुक्त नहीं हो पाया , मैं उसको मुक्त करने के लिए कुछ भी लीला कर देता हूँ । ऐसे ही सदन कसाई को शरण में लेकर सतभक्ति कराकर उद्धार किया था । कबीर परमात्मा की अद्भुत लीलाएं बली राजा की यज्ञ में बावना बने । फिर विशाल रूप किया । गज तथा मगरमच्छ युद्ध कर रहे थे तो उनकी भी गति भक्ति अनुसार की । द्रोपदी का चीर भी परमात्मा कबीर जी ने बढ़ाया । द्रोपदी श्री कृष्ण की भक्त थी । इसलिए बड़ाई कृष्ण को मिली ।

कबीर साहिब के चमत्कार

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मृत गऊ को जीवित करना  सिकंदर लोधी ने एक गऊ के तलवार से दो टुकड़े कर दिये । गऊ को गर्भ था और बच्चे के भी दो टुकड़े हो गए । तब सिकंदर लोधी राजा ने कहा कि कबीर , यदि तू खुदा है तो इस गऊ को जीवित कर दे अन्यथा तेरा सिर भी कलम कर ( काट ) दिया जाएगा । साहेब कबीर ने एक बार हाथ गऊ के दोनों टुकड़ों को लगाया तथा दूसरी बार उसके बच्चे के टुकड़ों को लगाया । उसी समय दोनों माँ - बेटा जीवित हो गए । साहेब कबीर ने गऊ से दूध निकाल कर बहुत बड़ी देग ( बाल्टी ) भर दी तथा कहा गऊ अपनी अम्मा है , इस पर छुरी न बाह । गरीबदास घी दूध को , सब ही आत्म खाय ।। चुटकी तारी थाप दे , गऊ जिवाई बेगि । गरीबदास दूझन लगी , दूध भरी है देग ।। इससे यह सिद्ध होता है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब ही हैं जिनका सच्चा मार्ग वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज ही दे रहे हैं इनका ज्ञान सुने अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट (Www.jagatgururampalji.org)  विजिट अवश्य करें